मसूर की खेती कैसे करते हैं?

 मसूर को बरौनी फसल के तौर पर उगाया जाता है जलवायु हालातो के आधार पर शिक्षित क्षेत्र में इसे दो-तीन बार सिंचाई की आवश्यकता होती है विजय के चार सप्ताह बाद एक सिंचाई जरूर करनी चाहिए और दूसरी फूल निकलने की अवस्था में करनी चाहिए फलिया भरने पर फूल निकलने की अवस्था सिंचाई के लिए गंभीर अवस्था होती है।

खेत की तैयारी कैसे करें?

हल्की मिट्टी में सेट वेट तैयार करने के लिए काम जुटा की आवश्यकता होती है भारी मिट्टी में एक गहरी जुताई के बाद तीन-चार हीरो से क्रॉस जुटा करनी चाहिए जमीन को समतल करने के लिए दो-तीन बार जुटा करनी चाहिए पानी के उचित वितरण के लिए जमीन समतल होनी चाहिए बीजों की बिजाई के समय खेत में उचित नवीन मौजूद होनी चाहिए।

बुवाई का समय।

मसूर के बीज को बीज उपचार करना चाहिए और इस सीरियल से बुवाई करनी चाहिए इसमें 50 किलो प्रति एकड़ डीएपी मिलना चाहिए 5 किलो एकड़ सल्फर अक्टूबर से लेकर नवंबर के पहले पखवाड़ा में बुवाई होनी चाहिए मसूर के पेड़  की दूरी कितनी होनी चाहिए 22 सेंटीमीटर दूरी पर होनी चाहिए।

1 एकड़ में बीज की मात्रा।1 

1 एकड़ में 15 से 20 किलो एकड़ पर्याप्त है मसूर के बीज का उपचार पहले बीज को कप्तान या थ्योरम 3 ग्राम प्रति किलो बीज का उपचार करें।

खाद्य उर्वरक

DAP 50 किलो 1 एकड़ 10 किलो यूरिया प्रति एकड़ 5 किलो एकड़ सल्फर 

सिंचाई का समय।

मसूर को 15 20 दिन में एक पानी देना चाहिए दूसरी बार 45 से 55 के बीच में देना चाहिए कीटनाशक दवाइयों का 35 से 45 दिन में पहला स्प्रे करना चाहिए और दूसरी स्प्रे 60 से 75 दिनों में करनी चाहिए।

मसूर की किसमे।

विक्रम और शिखा सबसे अच्छी मशहूर है फसल की अवधि यह फसल 120 से 130 दिनों में पक्के तैयार हो जाती है मसूर का मंडी का रेट 8000 से ₹10000 प्रति कुंतल बिकती है 5 से 8 कुंतल तक पर एकड़ पैदावारी है।

कटाई का समय।

जब फलिया पीली पड़ जाती है पत्ते गिरने लगते हैं जब हाथ से कटाई करवाना चाहिए।

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